मैफिल-ए-चुदास:पारिवारिक चुदाई कहानी(2019)पार्ट 3


माँ तो सो चुकी थी,अब्दुल चाचा के आने की कोई आशंका न थी।अंधेरा बहुत छा गया था,और दो जवान जिस्म गरम हो चुके थे।मेरे हाथ हिना चाची के चुचो को मसल रहे थे,बीच बीच में उनके रसीले ओंठो का रसपान भी हो रहा था,उनके निप्पल्स एकदम कठोर बन गए थे,लगता है बहोत  दिन से चुदाई नही हुई थी,पर अब्दुल चाचा तो बहोत टाइम घर पे रहते थे जब मैं कॉलेज जाता था तभी,फिर भी चाची की चुत की भूख इतनी कैसे?
पर कुछ भी हो अपने लन्ड के तो मजे थे।चाची लन्ड को सहला रही थी,लन्ड को फिर से खड़ा करवा रही थी।
उनकी गरम और कोमल हाथ से मेरा लन्ड ज्यादा देर राह न पाया और उठ खड़ा हुआ।जैसे ही उसने सलामी दी।इधर चाची के चेहरे के नक्से बदल गए।अजीब सी खुशी थी उसकी आंखों में।लब्जो की थरथराहट में अलग सी भूख थी।
ओ मुड़ी और थोड़ी थूक चुत पे और थोड़ी लन्ड पे डाल झुक गयी।अभी मेरी बारी थी।मैंने लन्ड को पीछे से छेद में सेट किया और अंदर घुसा दिया.
 "हाय दैया"
 चाची के मुह से सिसक निकल गयी।
 मैंने थोड़ा समय लेते हुए फिर से खुद को आगे पीछे करना चालू किया।
 अभी चुदाई का खेल रंगीन हो रहा था।पूरी रात अलग अलग आसनों में चुदाई लीला रची गयी।चाची ने तो चुदाई में मास्टर किया है अइसा महसूस हो रहा था।
 रात भर चुदाई के बाद भी सुबह नींद जल्दी खुली।मैं किचन में ही था,नंगा।ऊपर देखा तो 7 बज रहे थे।मैं उठा,बाथरूम अंदर था तो फ्रेश होकर नहा के बाहर आया।मा अभी सो रही थी।
 मैंने रोज की तरह अपने काम में ध्यान बटा दिया।
 हिना चाची सुबह ही नाश्ता बना के कहि बाहर गयी थी।मैन खुद भी खाया,मा को भी दिया,चाचा सुबह आये तो ओ भी बैठ गए क्योकि चाची भी घर पर नही थी।
 चाचा रात भर जगे थे तो ओ जाके सो गए।मा भी गोली लेके सो गयी।और मैं काम में लग गया।
 अभी जब भी चाचा का कोई काम निकलता तो हिना चाची का और मेरा रात का सुहागरात का कार्यक्रम हो जाता था।
 कभी कभी दिन में चाची के घर में भी हम चुदाई का खेल खेल लेते थे।
 अइसे ही दिन निकल रहे थे,मा की तबियत भी सुधर रही थी।पर आजकल हिना चाची मुझे हर बात के लिए बाहर लेके जा रही थी।कभी बाजार में सब्जी लेने,कभी शॉपिंग करने,मायके गयी तो भी मुझे लेके जाती थी।पहले तो लगा की मेरे पास बाइक है इसलिए अइसा करती होगी।

पर एक दिन जब हम शॉपिंग गए तो मुझे मेरे वर्क फ्रॉम होम के आफिस से कॉल आया की एक मेल किया है उसका रिप्लाई दे देना।पर चाची शॉपिंगऔर बारगिनिंग में व्यस्त थी।मैंने उनको पुकारा की मैं जा रहा हु।उन्होंने कुछ बोला नही बस "हुन्न"किया।और शॉपकीपर के साथ झगड़ा चालू रखा।
मुझे कुछ अंदाजा नही था की मेल महत्वपूर्ण है और क्या है मैं चिंता में बाइक चालू की।ट्रैफिक थोड़ा ज्यादा था तो चॉल के पिछले रास्ते वाले रॉड पर से गाड़ी निकली क्योकि हैम आखरी में रहते थे और मैं गाड़ी भी मेरे घर के पीछे वाले सुनसान गली में करता था पार्क ।
जैसे ही मैंने गाड़ी पार्क की मुझे किचन की खिड़की से कुछ आवाजे सुनाई दी।क्योकि पार्किंग करता था वह पे किचन की पिछली खिड़की आती थी।
मैंने देखा खिड़की थोड़ी खुली है।दोपहर थी और पिछली साइड में नाला भी था तो मैं खिड़की बन्द करने गया।
पर अंदर तो कुछ अलग ही चल रहा था।मुझे मेरे आंखों पर भरोसा न हुआ।
मेरी मा और अब्दुल चाचा नंगे एकदूसरे पर है।मतलब दोनो में चुदाई हो रही थी।मा चाचा का लन्ड हिला रही थी।
मा:"कितनी जल्दी झड़ जाते हो ,ये 3 बार है"
अब्दुल:"क्या करू रानी ,तू है ही गर्म माल"
मा:"इसलिए हिना बेन मेरे पति से चूदवाती थी,तुम 1 घण्टे में 3 बार झड़ गए"
अब्दुल:अरे ओ रंडिया का बोल ही मत,साली रात भर चुद लेगी तो भी जल्दी नही झड़ती।पहले तेरे पति से अभी बेटे से।
मा:'"नही तो क्या,कितनी चुदास है उसमे,रोज रात को चुदने आ जाती है,लोगो ने संदेय किया तो"
अब्दुल:"मुझे उसे चोदे करीब साल हो गया,और जब से तेरी चुत मिली है अब उसमे मन न रहा"
मा:"तो आजाओ ना सैया ये रानी और उसकी चुत तुम्हारी ही है,"
अब्दुल चाचा खड़ा लन्ड मा के चुत पर लगा के धक्का देने लगते है।उनका ये ठुकम ठुकाई का प्रोग्राम करिब 10 मिनट चलता है।
अब्दुल:"पर सविता ये छुपन छुपाई वाला खेल कब तक,हम निगाह क्यो नही कर लेते।"
मा:"संजू का क्या करे,हमारा जैसे तय हुआ था संजू के पापा और हिना बेन का और आपका और मेरा निगाह,पर ये जो अचानक हुआ ,उससे अभी संजू हिना से शादी करेगा क्या?"
अब्दुल:"मुश्किल तो है क्योकि जवान लड़का है चुदाई तक तो ठीक है पर शादी के लिए उसके कुछ और अरमान हो सकते है।देखते है हिना कितना उसे अपने कंट्रोल में करती है।
तभी चाचा का फोन बजा।
अब्दुल:"बोल हिना क्या हुआ?"
थोड़ी देर की बातचीत के बाद अब्दुल चाचा ने झट से कॉल रखा।
"सविता जल्दी तैयार हो जाओ।संजू आधे घंटे पहले वह से निकल गया"
"हाय दैया हिना ये बात अभी बता रही है"
"अरे नही उसे उसने कुछ नही बताया और निकल गुण,तुम रेडी हो जाओ,हमे अइसे देखा तो सब बिगड़ जाएगा।"

दोनो रेडी होकर सेफ पोजीशन में आ गये।पर मैं यह पर सारा मसला समझ गया।उस दिन की हसी पिछले कई महीनों का हिना चाची का लाडप्यार।मैं थोड़ा टाइम बाहर रुक अंदर जाके काम में लग गया।

अइसे ही और 1 2 महीना निकल गया।इस महीनों में चाची शादी वादी की बातें छेड़ने लगी।अभी घर में मा के होते चाची मेरे लन्ड के साथ छेड़खानी,किसिंग वैगर करने लगी।लगता है इन बुढऊ लोगो की सहन शक्ति खत्म हो रही है।

एक दिन तो हद हो गयी।अंदर मा चाचा चाची बात कर रहे थे मैं बाहर काम कर रहा था।थोड़ी अवकाश के बाद हिना चाची बाहर गयी।और मैं पानी पीने अंदर गया।और देखा तो क्या ।अब्दुल चाचा और मा चुदाई कर रहे थे।घर में जवान बेटा है इसकी भी ध्यान न था इनको।मुझे देख दोनो के पसीने छूटने लगे।तभी पीछे से भागती हिना चाची आयी।
ओ तीनो कुछ बोले उससे पहले में बाहर आया बाइक की चाबी ली और गुस्से जैसा दिखा के वहां से निकल गया।


To be continued...
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