आज मेरा ग्रैजुएशन पूरा हो गया।आज लग रहा था जैसे पापा के ऊपर का एक बोझ मैंने हल्का किया और नोकरी मिल जाएगी तो दूसरा भी हल्का कर दूंगा।फिर पापा आराम करेंगे और मैं माँ पापा की सेवा।
डिग्री का प्रोग्राम खत्म हुआ।मैं घर पे जाने के लिए यूनिवर्सिटी से निकला।और अब्दुल चाचा के घर के सामने आके रुक गया।अब्दुल चाचा मेरे घर के साइड में रहते थे मेरे पापा के साथ काम करते थे।मेरे घर के बाहर भीड़ थी।एक पल लगा सब मुझे बधाई देने के लिए इक्कठा हुए होंगे।मेरे ओंठो पे सुलझी सी मुस्कान आ गयी
मुझे देख अब्दुल चाचा मेरे पास आये और मेरे कंधे पे आके मेरे सर पे हाथ घुमाया"बेटा देखो जो होना है होकर रहेगा,अब तुम बड़े हो समझदार हो गए हो,अभी सब तुम्हारे जिम्मे है"
मैं उनके इस पहेली को सुलझा पाता उसके पहले ही माँ की चीख और रोना दोनो मेरे कानो में पड़ा,मेरे पैर मा की ओर दौड़ पड़े।सामने के नजारे ने मेरे होश उड़ा दिए।मेरे हाथ पाव में से सारी ताकद चली गयी अइसा महसूस हुआ।
मैं नीचे गिरने ही वाला था उसके पहले हिना चाची ने मुझे सहारा दिया और अपने कंधे पर सिर दबा के धीमे धीमे रोते हुए मुझे सांत्वना दे रही थी।जी हाँ हिना चाची अब्दुल चाचा की औरत,उनकी बीवी।
पापा के सारे विधि पार करके हम घर आये,मा थोड़ा सदमे में थी।
मैं बैठा था।तभी अब्दुल चाचा और हिना चाची आ गयी।
चाची अंदर मा के पास गयी और चाचा मेरे साइड बैठ गए।
मैं : "चाचा ये सब अचानक कैसे??
चाचा:" ओ फैक्टरी में थोड़ा काम का जोर था।पगार दुगना मिलने वाली थी।तो सब लोग जूट गए।पर मशनरी उसका जोर नही सहन कर पाई।और ज्यादा वर्क से मशनरी में करंट पास हुआ और हमारी बाद किस्मती की वह पर शिवराम काम कर रहा था।उसके साथ और दो लोगो की जान गयी।"
इस बात पर मुझे रोना आ गया।
चाचा मुझे संभालते हुए:"देख बेटा अलाह के मर्जी के खिलाप कुछ नही होता,अभी तुम एकलौते हो तो मा का खयाल रखना।
इधर हिना चाची भी मा को वही बात समझा रही थी।
एक महीना इसी चलबिचल में चला गया।मा थोड़ी सदमे से बाहर थी।रोज का काम कर रही थी।मैं भी अपना यूनिवसिर्टी का काम खत्म कर रहा था।जिससे जल्द से जल्द नोकरी ढूंढ सकू।
हिना चाची रोज आके मा को काम में मदत करती थी।मैं भी घर में रहता तो उनको हेल्प कर देता था।पापा के जाने के बाद मा बीमार होने लगी।कभी कभी तीन चार दिन तो कभी दो हप्ते पलँग पकड़ लेती थी।तब हिना चाची सब काम और माँ के मामले में मदत कर देती थी।अब्दुल चाचा और हिना चाची का बहुत सहारा था हमे।
मैं रोज हिना चाची को खाना बनाने में मदत कर देता था,जिस की वजह से मैं भी कुछ सिख लू।हिना चाची का बहोत से वक्त हमारे यहाँ ही बित जाता था,तो अब्दुल चाचा हमारे यह ही खाना खा लेते थे।
अभी मैं और हिना चाची काफी तरह से एक दूसरे के साथ खुल गए थे।मैं लड़की औरतो के मामले में शर्मिला नही था पर मैं ज्यादा उनसे बात भी नही करता था।
हुआ यू की एक दिन कम्प्यूटर पे कुछ काम करते हुए मेरा एक एडल्ट साइट के एडवरटाइजिंग के लिंक पर क्लिक हुआ।और उसके बाद जो दिखा उससे मेरे पेंट में लन्ड खड़ा हो गया।
मैंने करीब करीब उस साइट के बारह से तेरह वीडियो देख लिए।स्कूल कॉलेज में स्कोलर विद्यार्थियों में गिना जाता था तो ये भी झट से सिख गया।बस जब लन्ड खड़ा हो जाए तो पेंट में सेट कैसे किया जाता है ओ नही सिख पाया।
पर लन्ड को सेट करने का प्रयास जरूर किया पर तभी मुझे हिना चाची ने बुलाया।
मेरी तो हवाइयां उड़ गयी।मैं दिल थमा के किचन के पास पहुंच गया।और अंदर झुक के देखा तो चाची की पीठ मेरे बाजू थी।मैं अंदर गया
"जी चाची बुलाया"
"हा संजू ओ डिब्बा निकाल न,मेरा हाथ नही जा रहा है"
मेरे मन में डर सा तो पहले ही था,उसी जल्द बाजी में मैं कुछ न सोचे चाची के पीछे खड़ा होके शरीर तान के डिब्बा निकलने लगा।उसी चक्कर में मेरे लन्ड का घिसाव चाची के गांड के हुआ।चाची सलवार कमीज पहनती थी।तो उनके उभरे गांड पर उसका घिसाव उनके दिल तक महसूस हुआ
"आह सी ईई"
चाची सिसक गयी।चाची की सिसक से मुझे पसीना आने लगा।मैंने झट से सॉरी बोला और डिब्बा उनके हाथ में दे दिया।
चाची ने मुझे बाहर इंतजार करने बोला।मैं मा के साथ बेड के साइड में बैठ गया।चाचा भी आ चुके थे।फिर चाची सब खाना लेके बाहर आ गयी।
सब लोग खाना खाने लगे।चाची गुस्सा नही हुई इस विचार से मैं थोड़ा चैन की साँस लिया।
पर मुझ जैसे मासूम को क्या मालूम था की मेरे लन्ड देव की इस हरकत से हिना चाची की काम भावनाये (sex feelings) भड़क गयी थी।
मा बेड पे मैं और चाचा चाची डाइनिंग टेबल पर खाना खा रहे थे।चाचा दाये बाजू में तो हिना चाची मेरे सामने बैठी थी।
डाइनिंग टेबल छोटा था।
खाना खाते वक्त मेरा ध्यान जब भी ऊपर जाता हिना चाची की अजीब नजरे मुझे घूर रही ही इसका मुझे अहसास हो रहा था।मुझे ये आभास लगा पहले पहले पर बाद में मुझे उसकी तस्सली हो गयी की हिना चाची सच में मुझे घूर रही थी पर उनके आंखों में न प्यार था न गुस्सा।उनकी अजीब आंखे मुझे वह अनकंफर्टेबल करवा रही थी।
हद तो तब हो गयी जब उन्होंने बातें छेड़ दी
हिना चाची:क्यों सविता संजू की शादी कब करवा रही हो।
उम्र हो गयी है,निपटा दो,तुम्हे भी सहारा मिल जावेगा।
अब्दुल चाचा:जी भाभी,हम लोग तो है ही पर इसकी उम्र की हिसाब से शादी करवा दो,उतना की बदलाव आ जाएगा वातावरण में।
मा ने भी हस्ते हुए हामी भर दी।
पर तभी मेरे पैरो को किसी तरह का स्पर्श महसूस हुआ उस टच से शरीर में रोमांच सा फैल गया।मैने नीचे झुक कर देखा तो ओ चाची के पैर थे।पर मुझे लगा की मेरी ही गलती है तो मैंने अपने पैर पीछे करवा लिए।पर थोड़ी देर जाने के बाद चाची का पैर फिरसे मेरे पैर से छूने लगा।ओ अपने अंगूठे को घुमा रही थी।मैं थोड़ा हैरान था,मुझे भी मजा आ रहा था तो मैंने भी इनकार नही किया।
खाना खत्म होने के बाद हिना चाची बर्तन धोने गयी।
मा बेड पे सो गयीं,और चाचा हमेशा की तरह फैक्टरी चले गए।
सुबह से जो हो रहा था उस घटनाओ से मैं पूरा हिल चुका था।उस सदमे से बाहर आने की कोशिश ही कर रहा था तभी चाची ने मुझे पुकारा,आवाज तो रोज जैसी लग रही थी तो मैं भी हर बार की तरह ही उनको मदद करने उनके पास चला गया।
इसबार भी उनका पिछवाड़ा मेरे बाजू में ही था।पर क्यों न जाने उनकी उस उभरी गांड से मेरे शरीर में अलग सी फीलिंग आने लगी।मेरे मन में पहले जो उनके बारे में रेस्पेक्ट थी ओ वैसी ही थी पर भावनाये बदल रही थी।
चाची करीब 40 की उम्र पर थी।थोड़ी भारी भक्कम थी।
मेरे खयाल से 36'36'38 का फिगर होगा उनका,रंग थोड़ा सावला था पर उनका लुक अच्छा था,उनकी स्माइल किसी भी नौजवान को आधा पागल कर सकती थी।
मैं:जी चाची बुलाया।
हिना चाची:अरे ये ओढ़नी सही कर दो प्लीज,बार बार सामने गिर रही है ,बर्तन धोने में परेशानी हो रही है।
मैं मासूमियत से ठीक करने गया पर उनके दिल में शरारत थी अइसा मुझे तब मालूम गिरा।उन्होंने कमीज की बटन खोल रखे थे ,और उनके कमीज के गले की गोलाई आगे से बहुत नीचे की थी और उसमे सारे बटन्स खुले हुए थे तो,मैं थोड़ा हड़बड़ा गया।पहले उभरी हुई गांड और अभी आधे नंगे चुचे देख मेरा लन्ड भी हरकत में आ रहा था।
मेरे लन्ड की हरकत को महसूस तो चाची ने कर ही लिया पर साथ ही साथ मेरी हड़बड़ाहट को निकालने के लिए उन्होंने हस्ते हुए बोला।
"अरे मैं कर लेती पर साबुन से खराब हो जाएगा,तुम बिनधास्त कर लो ,मैं तुम्हारी ही हु....."
मैं :अ...क्या?
मेरे अइसे अचानक से चौकने पर ओ बोली
चाची:"अरे पगले मैं तुम्हारी चाची तो हु,तुमने क्या सोचा?"
और उन्होंने आंख मार के हस दिया।
मैं तो सुबह से ही सदमे में था ,पर सदमे में गिरानी वाली घटनाये बार बार हो रही थी,उसमे ये आंख मारना और उसपे हसना भी सबसे बड़ी बात थी।
मैं ओढ़नी ठीक ठाक कर के वहां से निकल गया।
पर उस दिन के बाद चाची सिर्फ सलवार कमीज में घूमने लगी घर में ,ओढ़नी ओ निकाल के रखती थी।और उसमे भी वही गहरा गले वाला कमीज और बटन्स खुले हुए।मैन एक दो बार बोला पर उन्होंने "गर्म होता है बीटा,और तू तो घर का ही आदमी है "बोल के बात वही दबा दी।
पर एकदिन जो हुआ ओ मेरे पूरे जिंदगी में घटे भयानक घटना कहो या आश्चर्यजनक कहो,पर उस घटना से मैं पूरा हिल गया।
रात के 10 बजे की बात थी।मैं कम्प्यूटर पे कुछ काम कर रहा था।जॉब नही था तो work from home करता था तो वही चालू था।
तभी मेरे मोबाइल में नोटिफिकेशन की घंटी बजी।
मुझे लगा ग्रुप में कुछ मस्ती चल रही होगी व्हाट्सअप पे।
पर दो तीन बार घंटी बजने पर मुझे मोबाइल को ओपन करना पड़ा।
किसी नए नंबर से मुझे मैसेज थे।
नोटिफिकेशन में "कैसी लग रही हु बताना।"ये 4 था मेसेज शो हो रहा था।
प्राथमिक अनुमान से ये तो मालूम हुआ की ये किसी औरत का नंबर है और उसके 4 मेसेज आ गए है।
मैंने मेसेज को ओपन किया तो पहले hii फिर दो फोटो और फिर"कैसी लग रही हु बताना" लिखा था।मेरे में अइसी चीजो में सहनशीलता(पैशन्स)बहोत कम है तो मैन झट से उसको ओपन किया।
फोटो को देख मैं सहर सा गया।मेरा लन्ड में हलचल आने लगी।ओ फोटो में ब्रा और नीचे सलवार अइसी आगे पीछे की फ़ोटो थी।चुचे ब्रा में समा नही रहे थे।शरीर से ओ थोड़ा उम्र ज्यादा होगी अइसी लग रही थी।
पहले तो मैंने सोचा की ये गलती से भेजा रहेगा या किसी दोस्त ने मजाक किया होगा।
पर ओ दोस्त कौन है ओ जानने के लिए मैंने ओ नंबर truecaller पे सर्च किया।
"अब्दुल जफर खान"
ये तो हद हो गयी।अभी सोचने वाली बात ही नही थी,क्योकि सरल साफ था की वो हिना चाची है।
पर मुझे उस समय क्या रियेक्ट करू यह सुझा नही इसलिए मैंने मेसेज रीड करके मोबाइल और कम्प्यूटर बंद कर सोने चला गया।नींद तो आने वाली थी नही दिनभर और ये अभी के घटना से पर मैंने सोने की पूरी कोशिश की।
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कहानी जारी रहेगी
कमेंट करके बताना कैसी लगी
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